अद्भुत श्री राम हरे हरे , हरे राम जय हरे हरे , हरि हरे हर क्लेश हरे, जन्म लिए प्रभु धाम अयोध्या, धन्य कियो प्रभु धरा अयोध्या। अद्भुत श्री राम हरे हरे श, हरि हरे हर क्लेश हरे, हर जन मानस के दिल में बसे, रोम-रोम प्रभु प्रेम रचै। कैसे जिए यह राह दिखाई, आदर्श पुत्र ,पति ,पिता ,और भाई, ऊंच-नीच का भेद मिटाया, झूठे बेर शबरी के खाया। अद्भुत श्री राम हरे हरे, हरि हरे हर क्लेश हरे, मर्यादा प्रभु सब को सिखाया, मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाए। जय जय प्रभु राम हरे हरे, हरि हरे हरे कृष्ण हरे, अद्भुत श्री राम हरे हरे। नीरजा।
त्याग दो बेशक मुझे पर चैन तुम ना पाओगे रूह में हूं मैं तुम्हारी मुझ बिन जी न पाओगे हर सांस में हर सोच में हर शब्द में तेरी समाहित मैं ही हूं हर घड़ी ,हर दिन हर महीने और साल में बिना शामिल मेरे ना होगा कोई लम्हा तेरे ख्याल में छीनना जो चाहे खुदा उससे भी लड़ मैं जाऊंगी पर तेरी रूखाई को मैं सह ना पाऊंगी त्याग दो बेशक मुझे पर चैन तुम ना पाओगे। त्याग दो..💔
आज नैना का पूरा बदन तेज बुखार से तप रहा था। उसे इतनी भी हिम्मत नहीं हो रही थी कि वो अपनी आंखे खोल कर घड़ी की ओर देख ले कि कितना समय हुआ है। ये तो अंदाजा हो रहा था कि रोज के उठने का समय बीत चुका है। पर और कितनी देर हो चुकी है इसका उसे पता नहीं चल पा रहा था। तभी भड़ाक से उसके कमरे का दरवाजा खुला। भतीजा सौम्य था। वो तुरंत ही उसके बिस्तर के पास आया और उसे हिला कर जगाते हुए बोला, "बुआ..! बुआ..! उठो ना..! कितना सो रही हो आज। देखो ना मेरी स्कूल बस के आने का टाइम हो रहा है। अभी तक ना आपने मुझे ब्रेक फास्ट दिया है। ना ही मेरा लंच बॉक्स तैयार किया है। क्या मैं भूखे.. बिना लंच लिए ही स्कूल चला जाऊं..?" नैना ने धीरे से अपनी आँखें खोली और सौम्य की ओर देख कर बोली, "बेटा...! मुझे तेज बुखार है। मेरी हिम्मत बिल्कुल भी नहीं हो रही है कि मैं उठ कर तुम्हारे लिए ब्रेक फास्ट, टिफिन तैयार कर सकूं। प्लीज अपनी मम्मी से तैयार करवा लो आज।" सौम्य बस नाम का ही सौम्य था। गुस्सा उसकी हरदम उसकी नाक पर रहता था। बुआ की बीमारी उसे बेवक्त आए मेहमान की तरह लगी। वो नैना का हाथ झटक कर पैर ...
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