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कटास राज: अदृश्य गवाह

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"कटास राज : द साइलेंट विटनेस     भाग 1", को प्रतिलिपि पर पढ़ें :, https://pratilipi.page.link/M2eoLNVaLBaSnrwG8 भारतीय भाषाओ में अनगिनत रचनाएं पढ़ें, लिखें और सुनें, बिलकुल निःशुल्क! आपके किए आज से ये नॉवेल पब्लिश हो रहा है रोज एक भाग आपको मिलेगा पढ़ने को। कैसा लगा आप अपनी अपनी राय जरूर बताए।🙏🙏🙏🙏🙏                   कटास राज : द साइलेंट विटनेस किंग एडवर्ड मेडिकल कॉलेज  सन् उन्नीस सौ छियालिस का समय बिहार के सिवान का एक छोटा मगर समृद्ध गांव। हर तरफ आजादी की मांग चरम पर पहुंच चुकी थी। देश के कोने कोने से, हर घर घर से बस एक ही आवाज  उठ रही थी आजादी… आजादी … आजादी….। गांधी का अंग्रेजों के खिलाफ भारत छोड़ो आंदोलन अपने चरम पर था।  हर दिल में असमंजस की स्थिति थी। कभी कोई खबर उड़ती उड़ती गांव में पहुंचती  .. तो कभी कोई..।  क्या बंटवारा होगा…! अगर होगा तो कैसे होगा…? भला ये कैसे संभव होगा…? कौन सा हिस्सा किसके हाथ सौंपा जाएगा….? क्या बंटवारे करना… शरीर को धड़ से जुदा करना नही होगा…? देश का हर हिस्सा...

द्रौपदी मुर्मू

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आज पूरे देश में चारों ओर बस एक ही बात की चर्चा है। वो है राष्ट्रपति चुनाव की।  जब बात राष्ट्रपति चुनाव की है है तो बात उसके कैंडिडेट की भी हो रही है। दो प्रत्याशी मुख्य रूप से खड़े होते है इस चुनाव में। एक सत्ता पक्ष का,दूसरा विपक्ष का। कैसी विडंबना है जो विपक्ष के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार जो खड़े है, कभी वो सत्ता दल के रीढ़ हुआ करते थे। मत भेद ने इस स्तर पर पहुंचा दिया की उन्हें आज जो कभी अपनी हुआ करती थी उसी पार्टी के खिलाफ खड़े है। यशवंत सिन्हा एक कद्दावर नेता है जो किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। यशवंत सिन्हा (जन्म: 6 नवम्बर 1937, पटना)[1] एक भारतीय राजनीतिज्ञ और भारतीय जनता पार्टी के पूर्व वरिष्ठ नेता और तृणमूल कांग्रेस के नेता रहे है | वे भारत के पूर्व वित्त मंत्री रहने के साथ-साथ अटल बिहारी वाजपेयी मंत्रिमंडल में विदेश मंत्री भी रह चुके हैं।  विपक्ष ने उन्हें  राष्ट्रपति चुनाव के लिए अपना राष्ट्रपति उम्मीदवार बनाया है। द्रौपदी मुर्मू ने साल 1997 में रायरंगपुर नगर पंचायत के पार्षद चुनाव में जीत दर्ज कर अपने राजनीतिक जीवन का आरंभ किया था। उन्होंने भाजपा...

सीबीएसई रिजल्ट, बोर्ड परीक्षा परिणाम

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आज मैं कोई भी कहानी या कविता नही लिख रही हूं। क्योंकि मैं कुछ भी होने से पहले मां हूं। और आज कल घर में बस रिजल्ट की बात हो रही है। तनाव की तो कोई बात नही पर अब और इंतजार नहीं हो पा रहा है रिजल्ट का। जैसा की आप सब को मालूम है इस बार दो एग्जाम हुए थे । फर्स्ट टर्म और सेकंड टर्म। फर्स्ट टर्म में बेटा 96.7 प्रतिशत नंबर पा चुका है। और सेकंड टर्म का पेपर भी बहुत ही अच्छा हुआ है। इस लिए विश्वास है परिणाम अच्छा नही बल्कि बहुत अच्छा आएगा। पर अब बेटा तो बच्चा है इंतजार अब हम दोनो से भी नही हो रहा है। बस मोबाइल उठाते ही हम तीनो बस रिजल्ट ही सर्च करते है।  पर बड़े ही दुख की बात है की इसका फायदा कई सारी न्यूज वेबसाइट उठा रही हैं। हेडलाइन में ऊपर ही लिखा दिखेगा रिजल्ट डिक्लेयर्ड चेक योर रिजल्ट। फिर जैसे ही ओपन करो पूरा पढ़ने का अनुरोध रहता है। जब लास्ट में जाओ तो लिख देते है अभी कोई निश्चित तिथि सीबीएसई ने नही बताई है। ये सब पढ़ कर बड़ा दुख होता है। सिर्फ व्यू के लिए लोगों को बेवकूफ बनाना, उनके इमोशन से खेलना क्या ठीक है...?  अब ये निर्णय आप ही करें क्या ये सही है...? क्या इन्हें झूठ लिखने ...

पल पल दिल के पास...

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https://www.matrubharti.com/novels/33739/pal-pal-dil-ke-paas-by-neerja-pandey ये कहानी है प्रणय और नियति की।  निः स्वार्थ प्रेम की एक बिलकुल अलग कहानी। एक ऐसा प्रेम जो सिर्फ और सिर्फ अपने साथी की खुशी चाहता है।  प्रणय और नियति की मुलाकात एक सफर के दौरान होती है। प्रणय पहली मुलाकात में ही नियति पे अपना दिल हार जाता है। ये एहसास एक तरफा नही होता है। नियति को भी कुछ ऐसा ही महसूस होता है। पर नियति के सामने कुछ मजबूरियां है। वो अपने कदम इस राह में आगे नहीं बढ़ा सकती। उसे ये एहसास हो गया था की प्रणय उसे यूं ही नहीं जाने देगा अपनी जिन्दगी से। वो हर उस बाधा को, हर उस परेशानी को मेरी राह से दूर कर देगा। पर नियति को ये मंजूर नहीं। वो अपने सारे जज्बात को बहुत पहले ही दफन कर चुकी थी। इस लिए इस सब का कोई मतलब नहीं था उसके लिए। अपनी जिम्मेदारियां उसके लिए सबसे पहली प्राथमिकता थी। वो बिना प्रणय को कुछ भी बताए उससे दूर बहुत दूर चली जाती है।  पूरी कहानी पढ़े। क्या प्रणय और नियति कभी मिल पाते है..? क्या नियति को प्रणय ढूंढ पाता है..? क्या उसे नियति की मजबूरी का पता चल पाता है..? क्या उस मज...