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कर्त्तव्य पथ.. चैप्टर 4

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चैप्टर 4 राम अंजोर ने खूब तरक्की की। पर ये तरक्की की थी औलाद पैदा करने में। बभना के पैदा होने के हर दूसरे साल वो बाप बन जाता था। बभना के बाद प्रभावती, शोभावती दो बेटियां बेटे के इंतजार में और हुईं। बड़े मन्नतों के बाद चौथी बार बेटा हुआ। उसका नाम जगदेव रक्खा गया।  राम अंजोर की मां किसी तरह का कोई वास्ता उससे नही रखती थीं। जाने कैसी चिढ़ थी उन्हें अपने ही सगे बेटे और बहू से। पर जगदेव के पैदा होने पर पूरे गांव को भोज अपनी तरफ से दिया धूम -धाम से उसकी बरही मनाई। और उसी दिन पियारी को मंत्र दे दिया कि एक बेटा कोई बेटा है। एक आंख कोई आंख है..! जल्दी से एक और बेटा वो पैदा करे।  पियारी जो ऐसी शक्ल सूरत की मालकिन थी कि जो भी देखे नजर ना हटा सके। पर बार - बार मां बनने ओर उचित खान पान देख भाल के अभाव में अपना स्वास्थ्य और सुंदरता दोनो गवांती जा रही थी। पर उसकी परवाह थी ही किसको..! बस वो तो राम अंजोर की इच्छा पूर्ति की मशीन भर बन कर रह गई थी।  जगदेव के डेढ़ साल के होने पर हरदेव का जन्म हुआ। और हरदेव के जन्म के समय जो पियारी ने खटिया पकड़ी फिर उठी नही।  बभना अब आठ बरस को हो गई थी।...

गुस्सा

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कर्त्तव्य पथ ..भाग 2

 चैप्टर 2 बिभावती देवी के शरीर में हरकत देख कर उन्हें अटेंड करने वाली नर्स का ध्यान उनकी ओर आकृष्ट हुआ। वो उठ कर पास आई। रोज यही ड्यूटी निभाने वाली नर्स कि अनुभवी आंखों से ना तो उनके आंखों से ढुलके दो बूंद आंसू छुप सके ना ही मन की पीड़ा। और उनके मुड़े हुए हाथों को सीधा कर सहलाते हुए आंखों के बड़े ही मीठे स्वर में बोली, "मां जी..! आप दुखी ना हो। अपने ही शरीर का जो अंग पूरे शरीर में जहर फैला दे। उसे काट कर निकाल देना ही बेहतर है। आपकी जिंदगी बच गई यही बहुत बड़ी बात है।" नर्स को आते जाते, सब जांच रिपोर्ट देखते, ये पता चल गया था कि उनके ये सगे बेटे नही हैं। वो बे औलाद हैं। वो उनके मन में उठ रहे ये सवाल को समझ गई कि वो जानना चाहती हैं कि आखिर उनको ये बीमारी कैसे हो गई…? उनको समझाते हुए बोली, "मां जी..! आप जानना चाहती है कि आखिर आपको ये कैंसर जैसी बीमारी कैसे हो गई..! तो किसको कब क्या हो जाए कुछ कहा नहीं जा सकता। पर जितना अभी तक के अनुमान लगाए गए हैं, उनके अनुसार को औरतें मां बनती हैं और अपने बच्चों को अपना दूध पिलाती हैं, उनमें स्तन कैंसर की संभावना कुछ प्रतिशत कम होती है, उन...

दिल नहीं मानता

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🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 ❤️ दिल नहीं मानता जमाने की बंदिशें, ये तो बस आजाद पंछी की तरह, खुले अम्बर में उड़ना चाहता है। नहीं मानता ये रवायतें जमाने की, तोड़ कर सारे बंधन जमाने के, ये तो बस तक तुझको बस तुझको, हर हाल में पाना चाहता है, तेरी बाहों में जीना मरना चाहता है।❤️            Neerja ✍️

अजीब दास्तान

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❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️ ❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️                 ✍️Neeraja 

कौन खैरख्वाह मेरा...🤔🤔🤔🤔

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❤️ ❤️   कौन जानता है ये, किसके दिल में क्या है.??? है मेरा खैरख्वाह वो या  मेरा बदख्वाह है। जिसकी फितरत हो जैसी  वो वैसे ही भाव रखता है। रक्खो बड़े आराम से,  जैसे भाव तुम चाहो, मेरा तो रखवाला है ऊपर वाला, किसी के चाहने से नहीं कुछ बिगड़ने वाला।              नीरजा ✍️

भुला कर सारे गांठ

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अहंकार

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हिम्मत नहीं हारना

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कर्तव्य पथ

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कर्तव्य पथ    Chapter कर्तव्य पथ ये कहानी है उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के एक छोटे से गांव सेमरी की। ये कहानी है एक लड़की के संघर्ष की। अनपढ़ होते हुए भी उसने जिस हिम्मत और हौसले से अपने जीवन के उतार चढ़ाव का सामना किया कि सब के लिए प्रेरणा स्त्रोत बन गई। पांच भाई बहनों में सबसे बड़ी बभना ने पहला आघात झेला अपनी मां की मृत्यु का। पर अपने नन्हे कंधों पर उसने बिना किसी के समझाए, सारी जिम्मेदारियां बड़ी कुशलता से निभाई। ईश्वर ने उसके इसी तपस्या का प्रसाद दिया कि उसका ब्याह एक संपन्न घर में बिना दान दहेज के हो गया। वो उस घर की बड़ी बहू बन गई। पर क्या बभना इस सौभाग्य को भोग पाई..? आखिर वो कौन सा तूफान उसके जीवन में आया जिसने उसे एक स्त्री से देवी के आसन पर बिठा दिया। उस तूफान का सामना बभना ने कैसे किया..? तो आइए एक बार फिर चलते है आप सब को ले कर नायिका बभना के संघर्ष यात्रा पर। आप नायिका के दुख दुख, खुशी गम को अंदर से महसूस करें ऐसी कोशिश रहेगी मेरी। तो फिर चलिए… मेरे साथ बभना की संघर्ष यात्रा पर। “बभना” के जीवन के संघर्ष के आप सब भी सहयात्री बनिए। लेखक : निर्मेश Published Unpublis...