ख्वाब

 कुछ काम अधूरे रह जाते है,
कुछ ख्वाब अधूरे रह जाते है।
ना तमाम इन कामों का अल्म,
हर लम्हा हर पल हमको तड़पाता है।
ये पता है हमको बखूबी,
हर ख्वाब मुकम्मल नहीं होते।
पर,जीने की ललक की खातिर,
काश ..! एक अदद ख्वाब तो,
भी तो मुकम्मल हुए ही होते। 
कुछ ख्वाब अधूरे रह जाते है,
ये अधूरे ख्वाब रातों की नींद,
दिन का चैन संग अपने उड़ा ले जाते है।

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